अनुरागे जिनके भजन - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, अनुराग लता (70)

अनुरागे जिनके भजन - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, अनुराग लता (70)

अनुरागे जिनके भजन, युगल किसोर-विहार।
तिन रसिकनि की चरन रज, लै-लै 'ध्रुव' सिर धार॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, अनुराग लता (70)

श्री ध्रुवदास जी कहते हैं कि जो रसिकजन युगल-किशोर के प्रेम-रस-विहार के भजन और चिन्तन में अनुरक्त हैं, उनकी चरण-धूलि को प्राप्त कर पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से बारम्बार शिरोधार्य करना चाहिए।