सुनो दिल जानी, मेरे दिल की कहानी तुम - ताज बीबी

सुनो दिल जानी, मेरे दिल की कहानी तुम - ताज बीबी

(कवित्त)
सुनो दिल जानी, मेरे दिल की कहानी तुम,
हुस्न की बिकानी, बदनामी भी सहूँगी मैं। [1]
देव पूजा ठानी, मैं निवाज हूँ भुलानी,
तजे कलमा कुरान, तेरे गुनन गहूँगी मैं॥ [2]
साँवरा सलौना सरताज सर कूल्हे दार,
तेरे नेह दाग में निदाग ह्वै रहूँगी मैं। [3]
नन्द के कुमार क़ुर्बान थाणी सूरत पै,
हौं तो मुग़लानी हिंदूआनी ह्वै रहूँगी मैं॥ [4]

- ताज बीबी

ताज बेगम [ताज बीबी] इस पद में डंके की चोट पर कहती हैं कि, "ए मेरे दिलजानी [श्री कृष्ण], मेरे दिल की कहानी को ज़रा सुनो, तुम्हारी रूप माधुरी ने मुझे ख़रीद लिया है, अब मैं हर प्रकार की बदनामी भी सहूँगी।" [1]

अब मैं नमाज़ को भूल कर सगुण साकार तुम्हारे सांवले सलोने स्वरूप की पूजा करूँगी, एवं कलमा क़ुरान त्याग कर तुम्हारे [श्री कृष्ण] गुणों का ही गान करूँगी। [2]

हे मेरे सिर ताज, रसिकन सिरमौर श्री कृष्ण, अब तो मैं तुम्हारी निष्काम भक्त बनकर ही रहूँगी। [3]

हे नंद के कुमार, मैं तो तेरी सुरत पर बलिहारी हूँ, यूँ तो मैं मुग़लानी हूँ, परंतु कृष्ण के लिए मैं हिंदूआनी होकर रहना ही मुझे स्वीकार है और इसके लिए मैं समस्त विरोध सहने को भी तैयार हूँ। [4]