प्रीति को बाण लग्यो तन पै - ब्रज के दोहे

प्रीति को बाण लग्यो तन पै - ब्रज के दोहे

प्रीति को बाण लग्यो तन पै, बदनामी को बीज मै बोय चुकी री।
मेरो कान्ह कुंवर सु तो नेह लग्यो, जिंदगानी सो हाथ मै धोय चुकी री॥

- ब्रज के दोहे

प्रेम का बाण तो मेरे शरीर पर चल ही चुका है। अतः अब मैं बदनामी का बीज बो चुकी हूँ। श्यामसुन्दर से प्रेम कर के मानो अपने जीवन से ही हाथ धो चुकी हूँ।