तिहि समान बडभाग को, सो सबके सिरमोर।
मन वच क्रम सर्वस सदा, जिनके जुगल किशोर॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सिद्धांत सुख (21)
जो मन, वचन और कर्म से सदा युगल-किशोर को ही रिझाते और लाड़लड़ाते हैं, उनके समान भाग्यशाली कौन है? वही जन सिरमौर हैं।
मन वच क्रम सर्वस सदा, जिनके जुगल किशोर॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सिद्धांत सुख (21)
जो मन, वचन और कर्म से सदा युगल-किशोर को ही रिझाते और लाड़लड़ाते हैं, उनके समान भाग्यशाली कौन है? वही जन सिरमौर हैं।

