दृग पात्र में प्रेम का जल भरि के, पद पँकज नाथ पखारा करुँ।
बन प्रेम पुजारी तुम्हारा प्रभो, नित आरती भव्य उतारा करुँ॥
- ब्रज के दोहे
हे नाथ, मेरे नेत्रों से बहने वाले प्रेमाश्रुओं से आपके चरण कमलों का नित्य अभिषेक करता रहूं। आपका प्रेम-पुजारी बनकर, आपकी सदा आरती उतारता रहूं।
बन प्रेम पुजारी तुम्हारा प्रभो, नित आरती भव्य उतारा करुँ॥
- ब्रज के दोहे
हे नाथ, मेरे नेत्रों से बहने वाले प्रेमाश्रुओं से आपके चरण कमलों का नित्य अभिषेक करता रहूं। आपका प्रेम-पुजारी बनकर, आपकी सदा आरती उतारता रहूं।

