मोहनता की रासि किसोरी - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (88)

मोहनता की रासि किसोरी - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (88)

(राग विहागरौ)
मोहनता की रासि किसोरी ।
जे मोहन मोहत सबकौ मन, बंधे बंक चितवन की डोरी ।। [1]
अंगनि पट-भूषन बिसराये , चितै रहे सुन्दर मुख ओरी ।
"हित ध्रुव" चैन हियैं तबही लौं, जब लगि देखत नैंननि गोरी ।। [2]

- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, पद्यावली (88)

नवल-किशोरी प्रिया के रूप-लावण्य में सबको प्रेम विमुग्ध करने की अपार क्षमता है, अतएव वे मोहनता की राशि हैं । जो श्रीलालजी अखिल-विश्व का मन मोहित करने में विख्यात हैं, वे भी किशोरी की बाँकी चितवन रूपी झीनी डोरी से बँध गए है । [1]
यहाँ तक कि उन्हें अपने अंग-प्रत्यंग देह, वस्त्र अवं आभूषणादि भी विस्मृत हो गए हैं तथा वे श्रीप्रिया के संदर मुख की ओर अपलक नेत्रों से निरखते ही रहते है । श्री हित ध्रुवदास जी कहते है कि प्रियतम के हृदय में तभी तक चैन रहता है, जब तक वे गौरांगी किशोरी का अपने नेत्रों से दर्शन करते रहते है । [2]