जै जै मचों ब्रज में चहूँ ओर ते बोल रहे नर नारी जौ जै जै - श्री छबीले जी

जै जै मचों ब्रज में चहूँ ओर ते बोल रहे नर नारी जौ जै जै - श्री छबीले जी

(सवैया)
जै जै मचों ब्रज में चहूँ ओर ते, बोल रहे नर नारी जौ जै जै। [1]
जै जै कहें सब देब विमानन, ब्रह्मा त्रिलोचन बोलत जै जै॥ [2]
जै जै कहें भृगु व्यास परासर, बोल रहे सनकादिक जै जै। [3]
जै जै ‘छबीले’ रँगीले रसीले की, बोलो श्रीबाँकेबिहारी की जै जै॥ [4]

- श्री छबीले वल्लभ गोस्वामी जी

ब्रजभूमि में चारों ओर नर-नारी उत्साह से पुकार रहे हैं—“जै-जै युगल सरकार की!” [1]

समस्त देवतागण अपने-अपने विमानों से एवं ब्रह्मा-भगवान शंकर भी जै-जैकार कर रहे हैं। [2]

भृगु, व्यास, पराशर जैसे मुनि और सनकादिक परमहंस भी प्रेम-विभोर होकर एक स्वर में पुकार रहे हैं—“जै-जै!” [3]

श्री छबीले जी कहते हैं कि ब्रज के रंगीले, रसीले रसिया की जै-जै, सब मिल बोलो श्री बाँके बिहारी की जै-जै। [4]