तेरौ मग जोवत लाल बिहारी - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (15)

तेरौ मग जोवत लाल बिहारी - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (15)

(राग कान्हरौ)
तेरौ मग जोवत लाल बिहारी।
तेरी समाधि अजहूँ नहीं छूटत चाहत नाहिंने नेंकु निहारी॥ [1]
औचक आइ द्वै कर सौं मूँदे नैंन अरबराइ उठी चिहारी।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा ढूँढ़त बन में पाई प्रिया दिहारी॥ [2]

- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (15)

श्री हरिदासी सखी कहती हैं कि हे प्यारी जू, श्री बिहारीजी आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं, आप हैं कि समाधि लिए बैठी हैं, एवं समाधि भी आप तोड़ना नहीं चाहती, आप श्री बिहारी जी को क्यों नहीं निहारना चाहती? [1]
अचानक श्री बिहारीजी आए एवं उन्होंने अपने हाथों से श्री प्यारी जू की आँखें मूँद दी, और वह शोर मचाने लगी । श्री बिहारीजी ने पूरे निकुंज वन में ढूँढा परंतु उन्हें प्यारी जू प्रवेश द्वार पर मिलीं । [2]