राधा मोहन मुख लगी, मुरली ह्वै दिन राति।
राधा ही राधा बजै, अति मोहनी धुनि जाति॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रियाप्रसाद (80)
राधा के मन को मोहने वाले मोहन श्री कृष्ण के मुख से मुरली दिन-रात लगी रहती है; वह उनके अधर-रस को नित्य पीती रहती है और सदा ‘राधा-राधा’ गान करती है, जिसकी धुन अत्यंत मोहिनी है।

