नमस्ते श्रियै राधिकायै परायै - जगद्गुरु आघनिम्बार्काचार्य, श्रीराधाष्टकम् (1)

नमस्ते श्रियै राधिकायै परायै - जगद्गुरु आघनिम्बार्काचार्य, श्रीराधाष्टकम् (1)

नमस्ते श्रियै राधिकायै परायै, नमस्ते नमस्ते मुकुन्दप्रियायै।
सदानन्दरूपे प्रसीद त्वमन्तः,  प्रकाशे स्फुरन्ती मुकुन्देन सार्धम् ।।

- जगद्गुरु आघनिम्बार्काचार्य, श्रीराधाष्टकम् (1)

श्री राधिके! तुम्हीं श्रेय मार्ग की अधिष्ठात्री हो, तुम्हें नमस्कार है, तुम्हीं पराशक्ति राधिका हो, तुम्हें नमस्कार है। तुम मुकुन्द की प्रियतमा हो, तुम्हें नमस्कार है। सदानन्दस्वरूपे देवि! तुम्हीं मेरे अन्त:करण के प्रकाश में श्यामसुन्दर श्रीकृष्ण के साथ सुशोभित होती हुई मुझ पर प्रसन्न होओ ।