राधा रसिक सँजीवनी, राधा जीवन लाल।
राधा मोहन मै सबै, ब्रज बन बेलि तमाल॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रियाप्रसाद (78)
श्री राधा ही रसिकों के लिए प्राण-दायिनी संजीवनी के समान हैं और वे ही प्रियतम लाल (श्री कृष्ण) का जीवन-प्राण हैं। ब्रज के वनों की प्रत्येक लता और तमाल के वृक्षों में साक्षात् श्री राधा और मोहन का ही स्वरूप समाया हुआ है; यहाँ सर्वत्र केवल वे युगल ही व्याप्त हैं।
राधा मोहन मै सबै, ब्रज बन बेलि तमाल॥
- श्री आनन्दघन जी, घनानंद ग्रंथावली, प्रियाप्रसाद (78)
श्री राधा ही रसिकों के लिए प्राण-दायिनी संजीवनी के समान हैं और वे ही प्रियतम लाल (श्री कृष्ण) का जीवन-प्राण हैं। ब्रज के वनों की प्रत्येक लता और तमाल के वृक्षों में साक्षात् श्री राधा और मोहन का ही स्वरूप समाया हुआ है; यहाँ सर्वत्र केवल वे युगल ही व्याप्त हैं।

