वृन्दाविपिन प्रभाव सुनि, अपनी ही गुन देत।
जैसे बालक मलिन कौं, मात गोद भर लेत॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (54)
इस वृन्दावन का अद्भुत प्रभाव सुनो—यह मलिन जीव को भी बिना किसी विचार के युगल-प्रेमस्वरूप अपना गुण प्रदान कर देता है; जैसे वात्सल्यमयी माता मैले-कुचैले बालक को भी स्नेहवश गोद में भर लेती है।

