को कबि वरनन कर सकै, ब्रज की रज को मूल।
जाके कण-कण में मिली, युगल चरण की धूल॥
- ब्रज के दोहे
कौन कवि ब्रज की इस परम-पावन रज की वास्तविक महिमा का वर्णन कर सकता है? इसके तो कण-कण में साक्षात् प्रिया-प्रीतम (श्री राधा-कृष्ण) के चरण-कमलों की रज मिली हुई है। यह सामान्य रज नहीं, अपितु युगल सरकार के दिव्य स्पर्श से ओत-प्रोत है।

