(सवैया)
अंग ही अंग जड़ाऊ जड़े, अरु सीस बनी पगिया जरतारी।
मोतिन माल हिये लटकै, लटुबा लटकै लट घूँघर वारी॥ [1]
पूरब पुन्य तें ‘रसखानि’ ये माधुरी मूरति आय निहारी।
चारो दिशा की महा अघनाशक, झाँकी झरोखन बाँके बिहारी॥ [2]
- श्री रसखान जी, रसखान रत्नावली
बांके बिहारी का अंग-अंग स्वर्णाभूषणों से जड़ा हुआ है, सिर पर सोने की जरीदार पगड़ी है। हृदय पर मोतियों की मालाएँ झूल रही हैं और घुँघराले लटों में झूमते हुए छोटे-छोटे घुँघरू लटक रहे हैं। [1]
रसखान कहते हैं—पूर्व जन्मों के पुण्यों के फलस्वरूप यह अद्भुत माधुरी-मूर्ति आज आँखों के सामने दिखाई दे रही है। बाँके बिहारी जी की वह झरोखे की झाँकी चारों दिशाओं के महान पापों का नाश कर देने वाली है। [2]
अंग ही अंग जड़ाऊ जड़े, अरु सीस बनी पगिया जरतारी।
मोतिन माल हिये लटकै, लटुबा लटकै लट घूँघर वारी॥ [1]
पूरब पुन्य तें ‘रसखानि’ ये माधुरी मूरति आय निहारी।
चारो दिशा की महा अघनाशक, झाँकी झरोखन बाँके बिहारी॥ [2]
- श्री रसखान जी, रसखान रत्नावली
बांके बिहारी का अंग-अंग स्वर्णाभूषणों से जड़ा हुआ है, सिर पर सोने की जरीदार पगड़ी है। हृदय पर मोतियों की मालाएँ झूल रही हैं और घुँघराले लटों में झूमते हुए छोटे-छोटे घुँघरू लटक रहे हैं। [1]
रसखान कहते हैं—पूर्व जन्मों के पुण्यों के फलस्वरूप यह अद्भुत माधुरी-मूर्ति आज आँखों के सामने दिखाई दे रही है। बाँके बिहारी जी की वह झरोखे की झाँकी चारों दिशाओं के महान पापों का नाश कर देने वाली है। [2]

