व्यास न कथनी कामकी, करनी है इक सार।
भक्ति बिना पंडित वृथा, ज्यौं खर चंदन-भार॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (52)
कथनी व्यर्थ है, करनी ही सार है। जैसे गधा चन्दन का बोझ तो ढोता है, पर उसके मूल्य को नहीं समझता; वैसे ही भक्ति के बिना पंडित भी व्यर्थ है। केवल शास्त्र और वेद सुनाने से क्या लाभ, यदि स्वयं भक्ति का आचरण न किया जाए?
भक्ति बिना पंडित वृथा, ज्यौं खर चंदन-भार॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (52)
कथनी व्यर्थ है, करनी ही सार है। जैसे गधा चन्दन का बोझ तो ढोता है, पर उसके मूल्य को नहीं समझता; वैसे ही भक्ति के बिना पंडित भी व्यर्थ है। केवल शास्त्र और वेद सुनाने से क्या लाभ, यदि स्वयं भक्ति का आचरण न किया जाए?

