(राग नायकी)
पोढ़े श्यामा श्याम संग। [1]
रंग महल की ललित तिबारी परदा परै सुरंग।। [2]
जगमगात पावक अंगीठी भरे रति रस रंग। [3]
नंददास दम्पति सुरत सुख जीत्यो मन मथ अंग ।। [4]
- श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली
श्री कृष्ण श्री राधा के संग रंग महल में विराज रहे हैं। [1]
रंग महल में तीन द्वार हैं जिसमें रंगीन परदे लगे हुए हैं। [2]
कई रंगों के अनमोल रत्नों से जटित एक अंगीठी से झिलमिल झिलमिल रौशनी प्रकट हो रही है जो रति रस को बढ़ाने का कार्य कर रही है। [3]
श्री नंद दास जी कहते हैं "दिव्य दम्पति श्री राधा कृष्ण ने सुरत रस बरसा कर अनंत कोटि कामदेवों की शोभा को पूर्णता हेय कर दिया है "। [4]
रंग महल में तीन द्वार हैं जिसमें रंगीन परदे लगे हुए हैं। [2]
कई रंगों के अनमोल रत्नों से जटित एक अंगीठी से झिलमिल झिलमिल रौशनी प्रकट हो रही है जो रति रस को बढ़ाने का कार्य कर रही है। [3]
श्री नंद दास जी कहते हैं "दिव्य दम्पति श्री राधा कृष्ण ने सुरत रस बरसा कर अनंत कोटि कामदेवों की शोभा को पूर्णता हेय कर दिया है "। [4]

