अमल अमोल है अनूपम हैं रेनु याकी,
सिद्धि कामना की देन वारी है अनन्द की। [1]
जाकौं अंग लाय लाय सार वस्तु पाय पाय,
गाय गाय बानी सुधा सानी प्रेम फन्द की॥ [2]
'लाल बलबीर' याकी महिमा कहाँ लौं कहूँ ,
और लोक लोक की बड़ाई सबै मन्द की। [3]
फन्द की हरैया है करैया आनन्द सदां ,
लीजिये विलोकि छवि वृन्दावन-चन्द की॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वृन्दावन शतक (63)
श्री लाल बलबीर कह रहे हैं कि श्री वृन्दावन की रेणु अमल, अमूल्य तथा अनुपम है, सिद्धि, कामना तथा आनंद प्रदान करने वाली है। [1]
सिद्धि कामना की देन वारी है अनन्द की। [1]
जाकौं अंग लाय लाय सार वस्तु पाय पाय,
गाय गाय बानी सुधा सानी प्रेम फन्द की॥ [2]
'लाल बलबीर' याकी महिमा कहाँ लौं कहूँ ,
और लोक लोक की बड़ाई सबै मन्द की। [3]
फन्द की हरैया है करैया आनन्द सदां ,
लीजिये विलोकि छवि वृन्दावन-चन्द की॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वृन्दावन शतक (63)
श्री लाल बलबीर कह रहे हैं कि श्री वृन्दावन की रेणु अमल, अमूल्य तथा अनुपम है, सिद्धि, कामना तथा आनंद प्रदान करने वाली है। [1]
श्री वृन्दावन की रेणु को अंग में लगाते हुए सार वास्तु की प्राप्ति हो जाती है, जिसे रसिकों ने अपनी वाणी में गाया है, जो रस समुद्र है तथा प्रेम में बांधने वाला है। [2]
मैं इसकी महिमा कहाँ तक कहूँ, 14 लोकों की महिमा भी श्री वृन्दावन की महिमा के समक्ष मंद है। [3]
संसार के फंदों को हराने वाला है तथा सदा के लिए आनंद प्रदान करने वाली है। श्री लाल बलबीर कहते हैं कि ऐसी श्री वृन्दावन की अनुपम छवि का दर्शन कीजिए। [4]

