प्रयश्चित्तमघानां महदपराधे परं शरणम्।
ससकलस्वधर्म-मौलिः पुमर्थमौलिश्च राधिकाविपिनम्।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.88)
सब पापों का प्रायश्चित-महत्-पुरुषों का अपराध हो जाने पर परम शरण लेने योग्य-समस्त स्वधर्मशिरोमणि एवं पुरुषार्थ चूड़ामणि केवल श्रीराधिका-विपिन (श्रीवृन्दावन) ही है।
ससकलस्वधर्म-मौलिः पुमर्थमौलिश्च राधिकाविपिनम्।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (4.88)
सब पापों का प्रायश्चित-महत्-पुरुषों का अपराध हो जाने पर परम शरण लेने योग्य-समस्त स्वधर्मशिरोमणि एवं पुरुषार्थ चूड़ामणि केवल श्रीराधिका-विपिन (श्रीवृन्दावन) ही है।

