भृकुटी नित तकत ब्रह्म जाकी, ताकि शरनाई डर काकी,
जब ऐसी हमारी सरकार, फिकिर मोहि काहे की।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
ब्रह्म श्रीकृष्ण भी जिनकी भौहें देखते रहते है अर्थात प्यारे श्यामसुंदर भी जिनके संकेत से चलते है, उनके शरण में जाकर फिर किसका भय है| जब ऐसी स्वामिनी जी हमारी रक्षा करने वाली, तब मुझे किस बात की चिंता है?
जब ऐसी हमारी सरकार, फिकिर मोहि काहे की।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
ब्रह्म श्रीकृष्ण भी जिनकी भौहें देखते रहते है अर्थात प्यारे श्यामसुंदर भी जिनके संकेत से चलते है, उनके शरण में जाकर फिर किसका भय है| जब ऐसी स्वामिनी जी हमारी रक्षा करने वाली, तब मुझे किस बात की चिंता है?

