सरिता रस सिंगार की, वहति सदाँ चहुँ ओर।
इक छत राज करें जु, श्री हरिप्रिया जुगल किशोर॥
-श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सिद्धांत सुख (439)
जिस वृन्दावन के चहुँ ओर श्रृंगार-रस ही यमुना-जल के रूप में प्रवाहित हो रहा है, वहाँ नित्य किशोर अवस्था वाले श्री प्रिया-प्रियतम सदा राज करते हैं।

