नारायण तू भजन कर, कहा करेंगे कूर।
स्तुति अरु निन्दा जगत के, दोउन के शिर धूर॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (27)
हे मन! तू तो केवल भजन कर; क्रूर जीव तेरा क्या बिगाड़ लेंगे? संसारी स्तुति और निंदा दोनों ही निरर्थक हैं—अन्ततः दोनों के सिर धूल ही पड़ती है। केवल भजन ही ऐसा साधन है, जो तुझे इस मृत्युलोक से बचाकर श्री राधा-कृष्ण के चरणों तक पहुँचा सकता है।
स्तुति अरु निन्दा जगत के, दोउन के शिर धूर॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (27)
हे मन! तू तो केवल भजन कर; क्रूर जीव तेरा क्या बिगाड़ लेंगे? संसारी स्तुति और निंदा दोनों ही निरर्थक हैं—अन्ततः दोनों के सिर धूल ही पड़ती है। केवल भजन ही ऐसा साधन है, जो तुझे इस मृत्युलोक से बचाकर श्री राधा-कृष्ण के चरणों तक पहुँचा सकता है।

