(कवित्त)
काहु को भरोसो है शेष को दिनेश को।
काहु को भरोसो है शंकर वरदानी को॥ [1]
काहु को भरोसो है उमा, रमा, शारदा को।
काहु को भरोसो है दुर्गा भवानी को॥ [2]
काहु को भरोसो है रिद्धिन को सिद्धिन को।
काहु को भरोसो है जोगी, जति, ज्ञानी को॥ [3]
मोहे तो भरोसो है मेरी राधा महारानी को।
मोहे तो भरोसो है मेरी राधा महारानी को॥ [4]
- रसिक वाणी
किसी को शेषनाग पर भरोसा है, कुछ को भगवान सूर्य पर भरोसा है। कुछ को भगवान शिव पर भरोसा है, जो वरदान देने के लिए प्रसिद्ध हैं। [1]
काहु को भरोसो है शेष को दिनेश को।
काहु को भरोसो है शंकर वरदानी को॥ [1]
काहु को भरोसो है उमा, रमा, शारदा को।
काहु को भरोसो है दुर्गा भवानी को॥ [2]
काहु को भरोसो है रिद्धिन को सिद्धिन को।
काहु को भरोसो है जोगी, जति, ज्ञानी को॥ [3]
मोहे तो भरोसो है मेरी राधा महारानी को।
मोहे तो भरोसो है मेरी राधा महारानी को॥ [4]
- रसिक वाणी
किसी को शेषनाग पर भरोसा है, कुछ को भगवान सूर्य पर भरोसा है। कुछ को भगवान शिव पर भरोसा है, जो वरदान देने के लिए प्रसिद्ध हैं। [1]
किसी को देवी पार्वती, देवी लक्ष्मी, या देवी सरस्वती आदि पर भरोसा है, अन्य कुछ को देवी दुर्गा पर भरोसा है। [2]
किसी को रिद्धि (धन) पर भरोसा है और कुछ को अपनी सिद्धियों (शक्तियों) पर भरोसा है। कुछ को योग ध्यान पर भरोसा है, कुछ को अपने आत्म-नियंत्रण पर भरोसा है, जबकि अन्य को अपने ज्ञान पर भरोसा है। [3]
परंतु मुझे तो एकमात्र भरोसा मेरी राधा महारानी पर ही है, अन्य किसी पर नहीं। [4]

