छिन छिन बन की छवि नई - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (22)

छिन छिन बन की छवि नई - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (22)

छिन छिन बन की छवि नई, नवल युगल के हेत।
समुझि बात सब जीय की, सखि वृन्दा सुख देत॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (22)

युगल को प्रसन्न करने के लिए वृन्दा सखी नित्य नये-नये प्रकार से वृन्दावन का श्रृंगार करती हैं। उनके हृदय की रुचि को भली-भाँति जानकर सेवा करती हुई वृन्दा सखी उन्हें सुख प्रदान करती हैं।