व्यास भक्ति कौ फल लहयौ, वृन्दावन की धूरि।
हित हरिवंश प्रताप तें, पाई ज़ीवनी मूरि॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (8)
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि श्री हित हरिवंश महाप्रभु के प्रताप से मेरे जीवन की मूल निधि यह वृन्दावन की रज, भक्ति के फलस्वरूप प्राप्त हुई है।
हित हरिवंश प्रताप तें, पाई ज़ीवनी मूरि॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (8)
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं कि श्री हित हरिवंश महाप्रभु के प्रताप से मेरे जीवन की मूल निधि यह वृन्दावन की रज, भक्ति के फलस्वरूप प्राप्त हुई है।

