ललित किशोरी लालजू - श्री ललित किशोरी देव, अभिलाष माधुरी, श्रिंगार शतक (59)

ललित किशोरी लालजू - श्री ललित किशोरी देव, अभिलाष माधुरी, श्रिंगार शतक (59)

ललित किशोरी लालजू, यही विनय तुम पाहिं।
कूकर सूकर ह्वै रहौं, श्री वृंदावन माहिं॥
- श्री ललित किशोरी देव, अभिलाष माधुरी, श्रिंगार शतक (59)

हे श्यामा-श्याम! मेरी यही विनती है कि चाहे मैं कूकर, शूकर अथवा किसी भी योनि में जन्म लूँ, परंतु मेरा नित्य वास श्री वृन्दावन धाम में ही हो।