(राग सारंग)
लालनु तेरेई आधीन ।
सुनि री सखी हो साँचि कहति हौं तू जल है ये मीन।। [1]
तेरे रस-बस स्यामसुंदर वर जाचत हैं जयौं दीन।
श्री बीठल बिपुल बिनोद बिहारी होत मनावत लीन।। [2]
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विठ्ठल विपुल देव जू की वाणी (20)
लालनु तेरेई आधीन ।
सुनि री सखी हो साँचि कहति हौं तू जल है ये मीन।। [1]
तेरे रस-बस स्यामसुंदर वर जाचत हैं जयौं दीन।
श्री बीठल बिपुल बिनोद बिहारी होत मनावत लीन।। [2]
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विठ्ठल विपुल देव जू की वाणी (20)
हे श्री राधा, श्री कृष्ण हर क्षण आपके आधीन रहते हैं ।श्री विट्ठल विपुल देव जी कहते हैं, “सखी मैं सत्य कहती हूँ, तुम जल के समान हो और श्री कृष्ण मछली के समान हैं ।जल से अलग होकर मछली कभी भी नहीं रह सकती, जल उसका प्राण है” ।[1]
हे प्रिया जू आपके रस के वशीभूत होकर श्री श्याम सुंदर दीन बनकर, नित्य ही याचना करते रहते हैं । श्री विट्ठल विपुल जी कहते हैं कि श्री बिहारीजी आपको मनाने एवं लाड़ लड़ाने में ही लीन रहते हैं । [2]

