चारों वेद सार यह गोविंद राधे ।
मन राधेरूप मुख राधे राधे गा दे ।।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (6587)
चारों वेदों का सार यही है कि मन से नित्य श्री राधा के रूप को निहारौ एवं मुख से राधे राधे गाओ ।
मन राधेरूप मुख राधे राधे गा दे ।।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, राधा गोविन्द गीत (6587)
चारों वेदों का सार यही है कि मन से नित्य श्री राधा के रूप को निहारौ एवं मुख से राधे राधे गाओ ।

