(राग मल्हार व कान्हरौ)
पोढ़े श्री राधा के गेह।
नवल धाम नवल शैय्या नवल बाँध्यो नेह॥ [1]
नवल सुन्दर नवल जीवन नवल बरखत मेह।
कृष्णदास प्रभु त्रैलोक नागर नवल श्याम सनेह॥ [2]
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (803)
नित्य दम्पति जुगल किशोर श्री राधिका जू के निभृत निकुञ्ज में शयन कर रहे हैं। शयन का स्थान ताजा और नविन है, और वैसी ही नविन शय्या है, और क्षण क्षण नविन प्रेम का प्राकट्य हो रहा है। [1]
उनकी सुंदरता नविन है, वैसी ही उनकी नविन अवस्था है और बारिश की नयी - नयी ताजा बौछारें गिर रही हैं। श्री कृष्णदास कहते हैं, "श्रीकृष्ण तीनों लोकों के स्वामी हैं, और श्री राधिका जू का प्रेम उनके लिए हर क्षण नित्य नविन है।" [2]
पोढ़े श्री राधा के गेह।
नवल धाम नवल शैय्या नवल बाँध्यो नेह॥ [1]
नवल सुन्दर नवल जीवन नवल बरखत मेह।
कृष्णदास प्रभु त्रैलोक नागर नवल श्याम सनेह॥ [2]
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (803)
नित्य दम्पति जुगल किशोर श्री राधिका जू के निभृत निकुञ्ज में शयन कर रहे हैं। शयन का स्थान ताजा और नविन है, और वैसी ही नविन शय्या है, और क्षण क्षण नविन प्रेम का प्राकट्य हो रहा है। [1]
उनकी सुंदरता नविन है, वैसी ही उनकी नविन अवस्था है और बारिश की नयी - नयी ताजा बौछारें गिर रही हैं। श्री कृष्णदास कहते हैं, "श्रीकृष्ण तीनों लोकों के स्वामी हैं, और श्री राधिका जू का प्रेम उनके लिए हर क्षण नित्य नविन है।" [2]

