अरुणतलमुपरि गौरं - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.26)

अरुणतलमुपरि गौरं - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.26)

अरुणतलमुपरि गौरं मधुरैर्लसितैर्हरेर्मनश्चैरम्।
राधायास्त्वतिसुन्दर चरणसरोजं मनो जपतु।।

- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (9.26)

तलवों में अरुणता, ऊपर के भाग में गौरवर्ण एवं मधुर लास्य के द्वारा श्रीहरि के मन को चुराने वाले, श्रीराधा के सुन्दर चरण-कमलों को मेरा मन जपता रहे।।