मेरी तो जीवन राधा  - हरिराए जी

मेरी तो जीवन राधा - हरिराए जी

(राग देश)
मेरी तो जीवन राधा, विन देखे नहिं चैन।
मोसो तो कछु चूक परी ना क्यौं, रुठी सुख देन ॥ [1]
 पैय्या परूँ में तोरे ललिता तोरे विसाखा तोरे तुम जाओ प्यारी को लैन।
धीरज प्यारी जू के देखे शीतल होंगे मेरे नैन।॥ [2]

- श्री हरिराय जी

यह मान लीला का पद है। श्री कृष्ण कहते हैं कि मेरी जीवन एक मात्र श्री राधा रानी हैं, और उनको देखे बिना मुझे चैन नहीं है। हे प्यारी, मेरे से क्या कोई चूक हो गई है, आप मुझे अपना संग नहीं दे रहीं ? [1]

हे ललिता, हे विशाखा, मैं आपके चरण पड़ता हूं, आप मेरी प्यारी जू के पास जाओ और उन्हें मना कर लाओ।  श्री कृष्ण कहते हैं कि मेरे नैनों को अब तभी शीतल मिलेगा और धीरज तभी बंधेगा जब मैं प्यारी जू के दर्शन करूंगा। [2]