लावण्यसाररस सारसुखैकसारे कारुण्यसार मधुरच्छविरूपसारे।
वैदग्ध्यसार रतिकेलिविलाससारे राधाभिधे मम मनोखिलसारसारे ।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (25)
लावण्य के सार, रस के सार, सुख के एकमात्र सार, करुणा के सार, मधुर छवि वाले रूप के सार, चतुरता के सार, प्रेम-क्रीडाविलास के सार तथा समस्त सारों के सार श्रीराधा नाम वाली स्वामिनी में मेरा मन रमण करे ।
वैदग्ध्यसार रतिकेलिविलाससारे राधाभिधे मम मनोखिलसारसारे ।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (25)
लावण्य के सार, रस के सार, सुख के एकमात्र सार, करुणा के सार, मधुर छवि वाले रूप के सार, चतुरता के सार, प्रेम-क्रीडाविलास के सार तथा समस्त सारों के सार श्रीराधा नाम वाली स्वामिनी में मेरा मन रमण करे ।

