(राग विलावल)
आठों भादों की उजियारी।
रावल में वृषभानु गोप के प्रगटी राधा प्यारी ॥ [1]
श्रुति स्वरूप सब संग कर लीने व्रजपति हेत विचारी।
दास गोपाल वल्लभ की स्वामिनी बस कीने गिरधारी॥ [2]
- श्री वल्लभ दास जी
आज श्री राधिका के प्राकट्य का आठवाँ दिन है, भादों का महीना है, और बहुत ही उजाले वाला दिन है क्यूँकि रावल में वृषभानु कुँवरी श्री राधा का प्राकट्य हुआ है । [1]
सब श्रुतियाँ श्रीजी की सेवा में विराजमान हैं, और श्री कृष्ण के ध्यान में डूबी हुई हैं । श्री वल्लभ दास जी कहते हैं कि मेरी स्वामिनी श्री राधा रानी ने गिरिधारी [कृष्ण] को पूर्ण रूप से अपना वश में कर रखा है । [2]

