(सवैया)
उन्हीं के सनेहन सानी रहै उन्हीं के जु नेह दिवानी रहैं।
उन्हीं की सुनै न औ बैन त्यों सैन सों चैन अनेकन ठानी रहैं॥ [1]
उन्हीं सँग डोलन में रसखानि सबै सुख सिंधु अधानी रहैं।
उन्हीं बिन ज्यों जलहीन ह्वैं मीन सी आँखि मेरी अँसुवानी रहैं॥ [2]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
हे रसखान! मैं उन्हीं के प्रेम में डूबी और उन्हीं के स्नेह में दीवानी हूँ। बस वही हैं, जिनकी मधुर वाणी सुने बिना मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता। [1]
उन प्रेम-सुधा बरसाने वाले मनमोहन के साथ रहने में ही मुझे आनंद का सागर प्राप्त होता है। उनके बिना तो मैं जल बिन मछली-सी तड़पती हूँ और मेरी आँखें सदैव अश्रुओं से भरी रहती हैं। [2]
उन्हीं के सनेहन सानी रहै उन्हीं के जु नेह दिवानी रहैं।
उन्हीं की सुनै न औ बैन त्यों सैन सों चैन अनेकन ठानी रहैं॥ [1]
उन्हीं सँग डोलन में रसखानि सबै सुख सिंधु अधानी रहैं।
उन्हीं बिन ज्यों जलहीन ह्वैं मीन सी आँखि मेरी अँसुवानी रहैं॥ [2]
- श्री रसखान, रसखान रत्नावली
हे रसखान! मैं उन्हीं के प्रेम में डूबी और उन्हीं के स्नेह में दीवानी हूँ। बस वही हैं, जिनकी मधुर वाणी सुने बिना मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता। [1]
उन प्रेम-सुधा बरसाने वाले मनमोहन के साथ रहने में ही मुझे आनंद का सागर प्राप्त होता है। उनके बिना तो मैं जल बिन मछली-सी तड़पती हूँ और मेरी आँखें सदैव अश्रुओं से भरी रहती हैं। [2]

