मन में लागि चटपटी, कब निरखूँ घनश्याम । नारायण भूल्यो सभी, खान पान विश्राम ।। - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (157) जिस हृदय में श्री कृष्ण दर्शन की वास्तविक लालसा होती है वह स्वतः ही खाना, पीना एवं विश्राम करना भूल जाता है ।