व्यास आस हरिवंश की, तिनहीं कौ बड़भाग।
वृंदावन की कुंज में, सदा रहत अनुराग॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (2)
श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि उन्हें तो आशा केवल श्री हित हरिवंश से ही है, और वे उन्हीं पर बलिहारी जाते हैं, जिनके प्रताप से वृंदावन की कुंजों में तथा श्री राधा-कृष्ण में उनका अनुराग नित्य बना रहता है।
वृंदावन की कुंज में, सदा रहत अनुराग॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (2)
श्री हरिराम व्यास कहते हैं कि उन्हें तो आशा केवल श्री हित हरिवंश से ही है, और वे उन्हीं पर बलिहारी जाते हैं, जिनके प्रताप से वृंदावन की कुंजों में तथा श्री राधा-कृष्ण में उनका अनुराग नित्य बना रहता है।

