वन्दावनगुणकीर्त्तिं प्रति रसना में नरीनर्ति।
परिजरिहर्त्ति न यज्ज्ञः सकलोपरि यद्वरीवर्त्ति ।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.6)
श्रीवृन्दावन की गुणकीर्त्ति गान करने में मेरी रसना नृत्य करती रहे। यह श्रीधाम सबसे ऊपर विरजामन है। बात को जानने वाला व्यक्ति इस श्रीवृन्दावन का कभी भी नहीं त्याग कर सकता।
परिजरिहर्त्ति न यज्ज्ञः सकलोपरि यद्वरीवर्त्ति ।।
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.6)
श्रीवृन्दावन की गुणकीर्त्ति गान करने में मेरी रसना नृत्य करती रहे। यह श्रीधाम सबसे ऊपर विरजामन है। बात को जानने वाला व्यक्ति इस श्रीवृन्दावन का कभी भी नहीं त्याग कर सकता।

