आनंद अनुभव होत नहिं - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (11)

आनंद अनुभव होत नहिं - श्री रसखान, प्रेम वाटिका (11)

आनंद अनुभव होत नहिं, बिना प्रेम जग जान।
के वह विषयानंद के, ब्रह्मानंद बखान॥
- श्री रसखान, प्रेम वाटिका (11)

इस संसार में जान लो कि बिना प्रेम के वास्तविक आनंद का अनुभव संभव नहीं है। प्रेम के बिना जो सुख प्रतीत होता है, वह या तो केवल क्षणभंगुर 'विषयानंद' (इंद्रिय सुख) है। उस ब्रह्मानंद के वास्तविक सुख को कोई प्रेमी ही समझ सकता है।