नारायण जप योग तप - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (149)

नारायण जप योग तप - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (149)

नारायण जप योग तप, सबसों प्रेम प्रवीन।
प्रेम हरि कूँ करत है, प्रेमी के आधीन॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (149)

जप, योग और तपस्या की अपेक्षा प्रेम परम प्रवीण और श्रेष्ठ है, क्योंकि वही नित्य श्री हरि को प्रेमी के अधीन रखता है।