(राग केदारौ)
प्यारी अब सोइ गई ।
जयौं जयौं जगावत त्यौं त्यौं नहिं जागत
प्रेम रस पान करि भोई गई ।। [1]
जागत होइ तौ जगाउँ प्यारी तातैंब परम सचु
रस ही रसिक रस बोई गई ।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
उठिकैं गरैं लगाई नवल प्रीति सौं नोइ गई ।। [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (47)
श्री हरिदासी [ललिता] सखी कहती हैं: हे प्यारे, प्यारी जू [राधिका] अब सो गयी हैं । जैसे जैसे मैं इन्हें जगाने की कोशिश करती हूँ, वैसे वैसे यह उतना ही नहीं जाग रही, यह प्रेम रस में संलग्न हैं । [1]
हे प्यारे, अगर वो जाग रही होती, तो मैं उन्हें जगा देती । उन्हीं की कृपा से साँचा रस [परम एवं सर्वोच्च रस] रसिकों [सहचरियाँ एवं प्रियतम] को प्राप्त हुआ है, अर्थात् उन्हीं [स्वामिनी जू] ने ही तो इस अद्बुत रस का बीज बोया है । श्री हरिदास जी कहते हैं कि हे प्यारे [कुंज बिहारी] श्यामा जू को उठ के गले से लगा लो, जिससे श्री प्यारी जू नवल प्रीति [सुरत विहार] में डूब गयी । [2]
प्यारी अब सोइ गई ।
जयौं जयौं जगावत त्यौं त्यौं नहिं जागत
प्रेम रस पान करि भोई गई ।। [1]
जागत होइ तौ जगाउँ प्यारी तातैंब परम सचु
रस ही रसिक रस बोई गई ।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
उठिकैं गरैं लगाई नवल प्रीति सौं नोइ गई ।। [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (47)
श्री हरिदासी [ललिता] सखी कहती हैं: हे प्यारे, प्यारी जू [राधिका] अब सो गयी हैं । जैसे जैसे मैं इन्हें जगाने की कोशिश करती हूँ, वैसे वैसे यह उतना ही नहीं जाग रही, यह प्रेम रस में संलग्न हैं । [1]
हे प्यारे, अगर वो जाग रही होती, तो मैं उन्हें जगा देती । उन्हीं की कृपा से साँचा रस [परम एवं सर्वोच्च रस] रसिकों [सहचरियाँ एवं प्रियतम] को प्राप्त हुआ है, अर्थात् उन्हीं [स्वामिनी जू] ने ही तो इस अद्बुत रस का बीज बोया है । श्री हरिदास जी कहते हैं कि हे प्यारे [कुंज बिहारी] श्यामा जू को उठ के गले से लगा लो, जिससे श्री प्यारी जू नवल प्रीति [सुरत विहार] में डूब गयी । [2]

