राधा नाम पै मैं वारी - श्री ललित किशोरी - अभिलाष माधुरी

राधा नाम पै मैं वारी - श्री ललित किशोरी - अभिलाष माधुरी

राधा नाम पै मैं वारी ।
मधुर मधुर मुरली में हित सों गावत रसिक बिहारी।। [1]
जो सुमरै अनुराग होत, दृग जुगुल रूप हितकारी ।
ललितकिशोरी छवि रस आगे षट रस लागत खारी ।। [2]

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (200)

मैं स्वयं को श्री राधा नाम पर बार-बार बलिदान कर देता हूं। वह राधा नाम ही है जिसे रसिक बिहारी श्री कृष्ण मधुर मधुर मुरली में प्रेम पूर्वक गाते हैं । [1]
जो भी इस नाम को प्रेम के साथ रटता है, यह नाम इतना हितकारी है कि आंखें में दिव्य युगल के रूप का प्रादुर्भाव प्राप्त हो जाता है। श्री ललित किशोरी कहते हैं कि सांसारिक सुखों के बारे में तो क्या कहना है, यहां तक कि अन्य सभी प्रकार के रस भी किशोरी श्री राधा की छवि की तुलना में व्यर्थ लगते हैं । [2]