संकेतकुंजमनुकुंजरमन्दगामि न्यादाय दिव्यमृदुचन्दन गन्धमाल्यम्।
त्वां कामकेलिरभसेन कदा चलन्तीं राधेऽनुयामि पदवीमुपदर्शयन्ती।।
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (22)
हे श्री राधे ! प्रेमविहार के आवेग से संकेत कुंज की ओर गज जैसी मन्द गति से प्रस्थान करती हुई आपके पीछे-पीछे, दिव्य और कोमल चन्दन तथा सुगन्धित माला लेकर आपको मार्ग दिखाती हुई कब चलूँगी ?

