राधा स्कन्धे वामबाहुप्रकोष्ठं धृत्वा कृष्णः मन्द मन्दंविहस्य ।
पश्यन् प्राचीं पाटलां सुप्रभाते हास्यं लेभे यत्र तन्मेनिजेष्टः ॥
- श्री केशवाचार्य, गोवर्द्धन शतक (20)
सुबह के समय श्री गिरिराज गोवर्धन के शिखर पर, श्री कृष्ण चंद्र बाईं भुजा को श्री राधा जू के कंधों पर डाले हुए, मंद मंद मुस्कुराते हुए, पूर्व दिशा की लालिमा को देख पुन मुस्कुराते हैं, ऐसे श्री गिरिराज मेरे इष्ट हैं ।
पश्यन् प्राचीं पाटलां सुप्रभाते हास्यं लेभे यत्र तन्मेनिजेष्टः ॥
- श्री केशवाचार्य, गोवर्द्धन शतक (20)
सुबह के समय श्री गिरिराज गोवर्धन के शिखर पर, श्री कृष्ण चंद्र बाईं भुजा को श्री राधा जू के कंधों पर डाले हुए, मंद मंद मुस्कुराते हुए, पूर्व दिशा की लालिमा को देख पुन मुस्कुराते हैं, ऐसे श्री गिरिराज मेरे इष्ट हैं ।

