काहे को वैद बुलावत हो - ब्रज के सवैया

काहे को वैद बुलावत हो - ब्रज के सवैया

काहे को वैद बुलावत हो, मोहि रोग लगाय के नारि गहो रे।
हे मधुहा मधुरी मुसकान, निहारे बिना कहो कैसो जियो रे॥ [1]
चन्दन लाय कपूर मिलाय, गुलाब छिपाय दुराय धरो रे।
और इलाज कछू न बनै, ब्रजराज मिलैं सो इलाज करो रे॥ [2]

- ब्रज के सवैया

क्यों वैद्य को बुलाते हो मेरी बीमारी दूर करने के लिए? मेरे प्रिय कृष्ण की मधुर मुस्कान देखे बिना मैं जीवित नहीं रह सकती। [1]

तुम व्यर्थ प्रयास कर रहे हो औषधि बनाने में — चंदन, गुलाब और कपूर मिलाकर। मैं तुम्हें विश्वास दिलाती हूँ, श्रीकृष्ण से मिलन के सिवा कोई उपचार मुझे स्वस्थ नहीं कर सकता। [2]