सौ बातन की बात इक, धरु मुरलीधर ध्यान।
बढ़वहु सेवा-वासना, यह सौ ज्ञानन ज्ञान॥
- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (74)
सौ बातों की एक बात यही है कि केवल उन मुरलीधर (श्री कृष्ण) का ही ध्यान हृदय में धारण करो। अपनी सेवा की अभिलाषा और लालसा को निरंतर बढ़ाते रहो; यही समस्त ज्ञानों का परम ज्ञान और सार है।
बढ़वहु सेवा-वासना, यह सौ ज्ञानन ज्ञान॥
- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (74)
सौ बातों की एक बात यही है कि केवल उन मुरलीधर (श्री कृष्ण) का ही ध्यान हृदय में धारण करो। अपनी सेवा की अभिलाषा और लालसा को निरंतर बढ़ाते रहो; यही समस्त ज्ञानों का परम ज्ञान और सार है।

