सखी मोय बूँद अचानक लागी - श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (105)

सखी मोय बूँद अचानक लागी - श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (105)

(राग मलहार)
सखी मोय बूँद अचानक लागी।
सोवत हुती मदन मदमाती घन गरज्यो तब जागी।। [1]
दादुर मोर पपैया बोलत कोयल शब्द सुहागी।|
कुम्भनदास लाल गिरधर सो जाय मिली बड़ भागी।। [2]

- श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी (105)

श्री राधा जू सखी से कहती हैं "हे सखी, वर्षा की बूंदें अचानक मुझ पर गिरने लगीं। मैं सो रहा थी, अपने प्रियतम श्री श्यामसुंदर के सुन्दर चिंतन में, उसी समय बादल ज़ोर से गरजने लगे और मैं जाग गयी। [1]
मेंढक, मोर और छोटी-छोटी सारिकायें तथा कोकिला मीठी मीठी धुन में गाने लगे। श्री कुंभनदास कहते हैं, "उसी समय श्री प्यारी जू अपने प्रियतम श्री कृष्ण से जा मिली।" [2]