(राग सुहा बिलावल)
बिहारी तेरे नैंना रूप भरे।
निरखि निरखि प्यारी राधे कों अनत न कहूँ टरे॥ [1]
सुख कौ सार समूह किसोरी उमँगि उमँगि अंकौ भरे।
श्रीललितमोहिनी की निजु जीवनि उर सों उरजि अरे॥ [2]
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (43)
श्री ललितमोहिनी देव कह रहे हैं "हे बिहारी जू, आपकी आँखों में श्री किशोरी जू की छवि समाई हुई है, जिनका दर्शन कर कर आपकी इन आँखों को कुछ और दिखाई नहीं पड़ रहा, क्यूँकी ये आँखें श्री राधे जू के दर्शन को छोड़ कहीं और जाती ही नहीं।" [1]
सुख की सार श्री किशोरी जू को आप अति उमंग भरे अंक में भर रहे हैं। श्री ललितमोहिनी देव कह रहे हैं "मेरे प्राण जीवन धन श्री कुंज बिहारी बिहारिणी जू एक दूसरे को दिव्य प्रेम में भरकर अपने अंक मे भर रहे हैं।" [2]
बिहारी तेरे नैंना रूप भरे।
निरखि निरखि प्यारी राधे कों अनत न कहूँ टरे॥ [1]
सुख कौ सार समूह किसोरी उमँगि उमँगि अंकौ भरे।
श्रीललितमोहिनी की निजु जीवनि उर सों उरजि अरे॥ [2]
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (43)
श्री ललितमोहिनी देव कह रहे हैं "हे बिहारी जू, आपकी आँखों में श्री किशोरी जू की छवि समाई हुई है, जिनका दर्शन कर कर आपकी इन आँखों को कुछ और दिखाई नहीं पड़ रहा, क्यूँकी ये आँखें श्री राधे जू के दर्शन को छोड़ कहीं और जाती ही नहीं।" [1]
सुख की सार श्री किशोरी जू को आप अति उमंग भरे अंक में भर रहे हैं। श्री ललितमोहिनी देव कह रहे हैं "मेरे प्राण जीवन धन श्री कुंज बिहारी बिहारिणी जू एक दूसरे को दिव्य प्रेम में भरकर अपने अंक मे भर रहे हैं।" [2]

