सखी मेरो आगम को दिन आयो - श्री परमानन्द दास, परमानन्द सागर (223)

सखी मेरो आगम को दिन आयो - श्री परमानन्द दास, परमानन्द सागर (223)

सखी मेरो आगम को दिन आयो।
ग्रीष्म तपत गयो मेरी सजनी बदरन छायौ॥ [1]
मेरे पिय आये है अबही नेह नीर भर आयौ ।
परमानन्द स्वामी रतिनायक सुरत हिंडोरे झुलायो॥ [2]

- श्री परमानन्द दास, परमानन्द सागर (223)

श्री परमानंद दास कहते हैं "हे सखी, मेरे आगे बढ़ने के दिन आ गए हैं, तप्ति हुई गर्मी समाप्त हो गई है तथा बादल छा गए हैं।" [1]
श्री परमानंद दास कहते हैं "मेरे प्रिय प्रेम शिरोमणि श्री श्यामसुंदर अभी को ही आये हैं, जिनका दर्शन कर मेरी आँखों से आँसू बह रहे हैं तथा वे मुझे अपने सुरत प्रेम के झूले में झूला रहे हैं।" [2]