वृन्दावनविधुरास्तामास्तां वृन्दावनेश्वरी - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.7)

वृन्दावनविधुरास्तामास्तां वृन्दावनेश्वरी - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.7)

वृन्दावनविधुरास्तामास्तां वृन्दावनेश्वरी तस्याः।
सन्तु च सख्यो वृन्दावनैकतरुपल्लवोऽतपि मोहयति।।

- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (7.7)

श्रीवृन्दावनचन्द्र की कथा तो दूर रही और श्रीवृन्दावनेश्वरी की तथा उनकी सखियों का तो कहना ही क्या है? श्रीवृन्दावन के एक वृक्ष का एक पत्ता भी समस्त जगत को मुग्ध करने वाला है।