राधा रूप समुद्र में, बह्यौ जात मनमीन।
मानसरोवर राधिका, मनहँस हमारो कीन॥
- ब्रज के दोहे
श्री राधा के अनुपम रूप रूपी अथाह समुद्र में मेरा मन रूपी मीन (मछली) बहता ही चला जा रहा है। श्री राधिका साक्षात् पावन मानसरोवर हैं, जिन्होंने मेरे मन को अपना राजहंस बना लिया है। अब यह मन-हंस केवल उन्हीं के रूप-अमृत का पान करता है।
मानसरोवर राधिका, मनहँस हमारो कीन॥
- ब्रज के दोहे
श्री राधा के अनुपम रूप रूपी अथाह समुद्र में मेरा मन रूपी मीन (मछली) बहता ही चला जा रहा है। श्री राधिका साक्षात् पावन मानसरोवर हैं, जिन्होंने मेरे मन को अपना राजहंस बना लिया है। अब यह मन-हंस केवल उन्हीं के रूप-अमृत का पान करता है।

