लता पता द्रुमबेलि हौं - श्री ललित किशोरी देव, अभिलाष माधुरी, श्रिंगार शतक (60)

लता पता द्रुमबेलि हौं - श्री ललित किशोरी देव, अभिलाष माधुरी, श्रिंगार शतक (60)

लता पता द्रुमबेलि हौं, खार छार फल फूल।
कैसेहुँ जुगल बसाइए, कालिन्दी के कूल॥

- श्री ललित किशोरी देव, अभिलाष माधुरी, श्रिंगार शतक (60)

हे युगल सरकार! मुझे किसी भी प्रकार यमुना के किनारे वृंदावन में ही बसाइए—चाहे लता, पत्ता, द्रुम, बेल, घास, रज-कण, फल या फूल किसी भी रूप में; परंतु मुझे वृंदावन से बाहर मत कीजिए।